Tuesday, January 28, 2025

वीणा जी की स्मृति में


वीणा जी के असमय निधन के समाचार को जान कर बहुत दुख हो रहा है। विश्वास ही नहीं हो पा रहा। मेरे पर उन्होंने गहरी और अमिट छाप छोड़ी है। मेरी तरह उनका जन्मदिन भी 17 जुलाई के दिन होने के कारण मैं उनके प्रति एक विशेष स्नेह का अनुभव करता हूँ। 

दो साल पहले ब्रेन ट्यूमर का पता चलने के बाद, वीणा जी ने अपनी बहादुरी, संघर्षशीलता, और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। उनकी अटूट इच्छाशक्ति और प्रेरणा ने उन सभी को प्रेरित किया जो उन्हें जानते थे या उनके संपर्क में आये।

वीणा जी का व्यक्तित्व उनकी चमकती मुस्कान में स्पष्ट दिखता था, जो कठिनाइयों के बावजूद कभी नहीं हटी। उनके सरल और स्पष्ट हृदय और स्वभाव ने उनके प्रति मेरे सम्मान को और भी बढ़ाया।

मेरी पुत्रवधू लीना की माँ के रूप में, वीणा जी का हमारे परिवार में एक विशेष स्थान था। उनके निधन से एक ऐसी रिक्तता बन गई है जिसे कभी भरा नहीं जा सकता, और मैं और सुनीता उनकी अनुपस्थिति को बहुत अनुभव करेंगे।

हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वीणा जी की आत्मा को सद्गति, शांति और मुक्ति मिले। उनकी मधुर स्मृतियाँ हमें साहस, प्रेम और संघर्ष के साथ जीवन जीने के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

प्रिय वीणा जी! चाहे शारीरिक रूप से आप अब हमारे मध्य नहीं हैं, आपकी विरासत और यादें हमारे दिलों में सदा जीवित रहेंगे और प्रेरणा देते रहेंगे।

Saturday, January 11, 2025

मेरी व्यथा

लगता है गुजरते वक्त के साथ
मेरा दिमागी संतुलन भी धीरे-धीरे जा रहा है

यूं ही बैठे-बैठे आंखों का नम हो जाना, 
बहुत सोचना, हमेशा उलझन में रहना
कहने को तो एक से बढ़ कर एक हर रिश्ता है मेरा
लेकिन फिर भी खुद को अकेला पाता हूं
भीड़ में होते हुए भी अकेलापन महसूस करता हूं

ऐसा लगता है मानों सब कुछ छिन गया है, खो गया है
किसी भी चीज में मन नहीं लगता, 
मोबाइल को थामे सोचता रहता हूं कि अब क्या करना है

बस दिल करता है कहीं दूर चला जाऊं 
एक ऐसी जगह जहां मेरे सिवा कोई ना हो,
जहां मैं खुली सांस ले सकूं, खुलकर रो सकूं चीख सकूं!


(Munazir Alam की रचना My Story से अनूदित)